उर्दू शायरी · ग़ज़ल

Thahri Thahri si zindagi kyon hai

ठहरी ठहरी सी ज़िंदगी क्यों है

ٹھہری ٹھہری سی زندگی کیوں ہے

शायर: Aadarsh Dubey5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ठहरी ठहरी सी ज़िंदगी क्यों है
मेरी आँखों में ये नमी क्यों है

जिस को आँखो से दूर रखना था
आज क़ुर्बत में फिर वही क्यों है

जबकि सच्चाई सिर्फ़ स्याही है
फिर मिरे घर में रौशनी क्यों है

बूँद की भी तो एक दुनिया है
बूँद के बिन नदी नदी क्यों है

तुम को 'आदर्श' सब मिला है यहाँ
दिल में फिर भी ये तिश्नगी क्यों है