उर्दू शायरी · ग़ज़ल

Thahra na kuchh yahan pe jo aaya wo bik gaya

ठहरा न कुछ यहाँ पे जो आया वो बिक गया

ٹھہرا نہ کچھ یہاں پہ جو آیا وہ بک گیا

शायर: Aamir Azher4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ठहरा न कुछ यहाँ पे जो आया वो बिक गया
बाज़ार में बस एक ख़रीदार टिक गया

इक दो मिनट ही आँख लगी होगी मेरी बस
क्या बे-क़रार ख़्वाब था इतने में दिख गया

देखा वो बंद रास्ता आगे खुला मिला
जो जीते जी न देखा वो मरने पे दिख गया

'आमिर' तुम्हारे शे'र पे होने लगी है बात
कुछ तुम को भी शु'ऊर है क्या तुम से लिख गया