उर्दू शायरी · ग़ज़ल

betab se betab teri tab le aae

बेताब से बेताब तिरी ताब ले आए

بیتاب سے بیتاب تری تاب لے آئے

शायर: Aamir Azher7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बेताब से बेताब तिरी ताब ले आए
जीना पड़ा ऐसों को भी जो जी नहीं पाए

बातें वही बातें वो न बोली हुई बातें
इस तेज़ी से लगती हैं कि अल्लाह बचाए

दिखती रही फैली हुई गर्दूं की सियाही
कितने ही सितारे मिरी आँखों ने गिनाए

ता'रीफ़ भी ऐसी हमें करनी नहीं आई
अल्फ़ाज़ भी ऐसे मुत'अद्दिद ही बनाए

यक-लख़्त उंडेले गए हम होश में हर बार
जाते हुए ख़्वाबों को कभी देख न पाए

जानोगे तो जानम तुम्हें जाने नहीं देंगे
बेहतर है इन औहाम को जाने दिया जाए

आवाज़ से पैवस्ता इक अंदाज़ है 'आमिर'
अंदाज़ का अंदाज़ा मगर कौन लगाए