उर्दू शायरी · ग़ज़ल

abhi qubul hai mujhko udas ho jaana

अभी क़ुबूल है मुझ को उदास हो जाना

ابھی قبول ہے مجھ کو اداس ہو جانا

शायर: Aamir Azher7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अभी क़ुबूल है मुझ को उदास हो जाना
अभी नसीब है क़दमों में उन के सो जाना

किसी किताब से कैसे कोई निकलता है
किसी किताब से टूटा गुलाब तो जाना

तिरी शबीह में देखा जहाँ में जो देखा
तिरी मिसाल से जाना जहाँ में जो जाना

ज़माना एक में तहलील कर रहा है मगर
हमेशा मैं ने सफ़ेद-ओ-सियह को दो जाना

ये किस के अश्क पड़े हैं ये क़ब्र किस की है
ये कौन रोक रहा है किसी का खो जाना

ये कितनी मर्तबा कितनों के साथ होता है
निकल कर एक सफ़र पर सफ़र का हो जाना

बला के शे'र थे 'आमिर' बला का शोर भी था
बला का शहर था जिस ने न आप को जाना