उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chalte jate hain par nahin aati

चलते जाते हैं पर नहीं आती

چلتے جاتے ہیں پر نہیں آتی

शायर: Aamir Azher7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चलते जाते हैं पर नहीं आती
आख़िरी रहगुज़र नहीं आती

हम को बेचैन कर के रखती है
एक शय जो नज़र नहीं आती

आँख में कुछ चला गया शायद
आँख यूँही तो भर नहीं आती

बैठे बैठे ख़याल आता है
उन की कोई ख़बर नहीं आती

इस क़दर कम दिखाई देता है
एक सूरत नज़र नहीं आती

वो बला मेरे सर में रहती है
जो बला मेरे सर नहीं आती

रोज़ पुर्सिश को लोग आते हैं
मौत जब वक़्त पर नहीं आती