उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bahut mushkil ki KHwahish ko kabhi aasan nahin dekha

बहुत मुश्किल की ख़्वाहिश को कभी आसाँ नहीं देखा

بہت مشکل کی خواہش کو کبھی آساں نہیں دیکھا

शायर: Aamir Azher6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बहुत मुश्किल की ख़्वाहिश को कभी आसाँ नहीं देखा
नया इंसाँ बनाने में कोई इंसाँ नहीं देखा

वहाँ बरसात देखी है जहाँ इम्काँ नहीं देखा
अभी तक इस पुर-उम्मीदी ने रेगिस्ताँ नहीं देखा

गुमाँ गुज़रे त'अल्लुक़ पर कि जब तर्क-ए-त'अल्लुक़ पर
मुझे रोना नहीं आया उसे हैराँ नहीं देखा

अगरचे देखते रहते हैं पर देखा नहीं जाता
कई वीरानियाँ देखी हैं घर वीराँ नहीं देखा

निगाहें सारी उन पे हैं त'अज्जुब सारा हम पे है
तो क्या सच में नहीं देखा अरे हाँ हाँ नहीं देखा

नज़र तुम ने गँवा दी है मगर आँखें तो बाक़ी हैं
बहुत मुमकिन है तुम ने भी रुख़-ए-जानाँ नहीं देखा