उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tha yaqin mein na wo guman mein tha

था यक़ीं में न वो गुमान में था

تھا یقیں میں نہ وہ گمان میں تھا

शायर: Dashmesh Gill Firoze6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

था यक़ीं में न वो गुमान में था
जो ख़ला क़ल्ब-ओ-जिस्म-ओ-जान में था

नज़्र-ए-आतिश किया जिसे मैं ने
मैं अकेला ही उस मकान में था

भीड़ थी बे-क़रार लम्हों की
और मैं 'ऐन दरमियान में था

रौशनी हर जगह न थी मुमकिन
इक ही सूरज तो आसमान में था

मर गए लफ़्ज़ पैदा होते ही
ज़हर इतना मिरी ज़बान में था

था उधर डर हिरन की आँखों में
और इक तीर इधर कमान में था