उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ai mere thakte hue sae na kar takrar tu

ऐ मिरे थकते हुए साए न कर तकरार तू

اے مرے تھکتے ہوئے سائے نہ کر تکرار تو

शायर: Dashmesh Gill Firoze6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐ मिरे थकते हुए साए न कर तकरार तू
अब सफ़र में रह गया है इक मिरा ग़म-ख़्वार तू

इस क़दर मसरूफ़ था वो शख़्स उस ने एक दिन
ख़ुद से पूछा आज-कल रहता कहाँ है यार तू

बैठे बैठे यूँ सिरहाने कब से मुझ बीमार के
देख मेरी मौत ख़ुद लगने लगी बीमार तू

छोड़ कर ज़िंदाँ में तुझ को वो तो कब के जा चुके
जिन की तस्वीरें बनाता है सर-ए-दीवार तू

हो रहा हूँ जो सर-ए-सहरा ज़लील-ओ-ख़्वार मैं
ऐ किताब-ए-'इश्क़ इस हालत की ज़िम्मे-दार तू

सर न ख़म करने की 'आदत के नताएज देख ले
मुश्तहर है अब सर-ए-कू-ए-सलीब-ओ-दार तू