उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sahra hai ye hayat yahan ghar na DhunDhiye

सहरा है ये हयात यहाँ घर न ढूँढिए

صحرا ہے یہ حیات یہاں گھر نہ ڈھونڈیئے

शायर: Dashmesh Gill Firoze5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सहरा है ये हयात यहाँ घर न ढूँढिए
सो जाइए ज़मीन पे बिस्तर न ढूँढिए

बनते बिखरते दाएरों के दरमियाँ कहीं
पानी में जो गिरा था वो कंकर न ढूँढिए

उन को सितारे ले गए होंगे सर-ए-फ़लक
मैदाँ में जो क़लम हुए वो सर न ढूँढिए

तिश्ना-लबी के जश्न में प्यासे ही नाचिये
जाम-ओ-सुबू-ओ-मीना-ओ-साग़र न ढूँढिए

माज़ी को अब न ढूँढिए इन आइनों में आप
लगने लगेगा आप ही से डर न ढूँढिए