उर्दू शायरी · ग़ज़ल

raha na jab koi hila tujhe bhulane ka

रहा न जब कोई हीला तुझे भुलाने का

رہا نہ جب کوئی حیلہ تجھے بھلانے کا

शायर: Dashmesh Gill Firoze9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रहा न जब कोई हीला तुझे भुलाने का
पकड़ लिया गया रस्ता शराब-ख़ाने का

ख़मोशी-ए-शब-ए-तीरा ने कर दिया पागल
वगरना शौक़ था किस को मकाँ जलाने का

ख़ुदा नई कोई दुनिया बना रहा होगा
सो उस को वक़्त नहीं अब ज़मीं पे आने का

मिरी फ़ना में तू शामिल था साथ ग़ैरों के
सो कोई नाम नहीं मैं ज़बाँ पे लाने का

मैं अपने आप से रूठा हुआ हूँ पास मिरे
नहीं है वक़्त किसी और को मनाने का

कहा है सब ने मैं सहरा में जा के बस जाऊँ
वही ख़याल है मेरा जो है ज़माने का

तसव्वुर-ए-ग़म-ए-हिज्राँ में मुब्तला हो कर
मैं वस्ल के हसीं लम्हे नहीं गँवाने का

हर एक दौर का हर ज़ख़्म है 'अज़ीज़ हमें
नहीं है फ़र्क़ हमें अब नए पुराने का

ये शाम और ये शराबें ये महफ़िल-ए-याराँ
यही तो वक़्त है दिन भर के ग़म भुलाने का