उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sae ke liye apna shajar le ke chale hain

साए के लिए अपना शजर ले के चले हैं

سائے کے لیے اپنا شجر لے کے چلے ہیں

शायर: Dashmesh Gill Firoze8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

साए के लिए अपना शजर ले के चले हैं
हम घर से ही सामान-ए-सफ़र ले के चले हैं

हम ले के चले जो भी जहाँ में था हमारा
हम अपने सभी 'ऐब-ओ-हुनर ले के चले हैं

दो लोग हमें लाए थे इक रोज़ जहाँ में
और आज हमें चार बशर ले के चले हैं

माना कि नहीं मश'अलें ज़ुल्मत के सफ़र में
आँखों में मगर ख़्वाब-ए-सहर ले के चले हैं

कल जिस से गिरे टूट के वो शाख़ जिधर है
झोंके हमें फिर आज उधर ले के चले हैं

आया है 'अदू फूल लिए और इधर हम
सरहद की तरफ़ तेग़-ओ-सिपर ले के चले हैं

दामन में है सहरा से कमाई हुई दौलत
हम ज़ख़्म नहीं ला'ल-ओ-गुहर ले के चले हैं

ये फूल ये रेशम का कफ़न क़ब्र में यारो
हम को नहीं दरकार मगर ले के चले हैं