उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri sanson ka zer-o-bam jaanam

तेरी साँसों का ज़ेर-ओ-बम जानम

تیری سانسوں کا زیر و بم جانم

शायर: Yahya Khan Yusuf Zai5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरी साँसों का ज़ेर-ओ-बम जानम
तोड़ दे सब्र का भरम जानम

ये बदन कोई पुर-ख़तर रस्ता
फ़ित्ना-सामाँ है ख़म-ब-ख़म जानम

ऐसी नाज़ुक कमर कि जुलते हैं
बहती नदियों के पेच-ओ-ख़म जानम

तुम ने बस मुस्कुरा के देख लिया
लड़खड़ाने लगे क़दम जानम

इतनी मुद्दत के बा'द मिलती हो
हाल पूछोगी कम से कम जानम