उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri aankhon se mahakte hue kuchh KHwab chunun

तेरी आँखों से महकते हुए कुछ ख़्वाब चुनूँ

تیری آنکھوں سے مہکتے ہوئے کچھ خواب چنوں

शायर: Yawar Azeem7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरी आँखों से महकते हुए कुछ ख़्वाब चुनूँ
शाख़-ए-मिज़्गाँ पे खिले अंजुम-ओ-महताब चुनूँ

पिछले यारों ने बहुत रंज दिए थे मुझ को
अब बहुत सोच समझ कर नए अहबाब चुनूँ

चाँद के माथे पे सिलवट नहीं अच्छी लगती
कोई तालाब चुनूँ बे-शिकन-ए-आब चुनूँ

इस चुनाव में मिरी जीत बहुत मुश्किल है
इतने लफ़्ज़ों में घिरा हर्फ़-ए-ग़ज़ल-याब चुनूँ

मुतरिबा अब वो मिरा 'इश्क़ हो या मेरी अना
साज़-ए-वहशत के लिए आख़िरी मिज़राब चुनूँ

ऐसी पी-आर कमाना मुझे आता ही नहीं
सस्ते लोगों के लिए क़ीमती अलक़ाब चुनूँ

जिस घड़ी सा’द सितारों का मिलन हो 'यावर'
वस्ल-ए-जानाँ को वही सा’अत-ए-नायाब चुनूँ