उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri aankhon ki chamak bas aur ek pal hai abhi

तेरी आँखों की चमक बस और इक पल है अभी

تیری آنکھوں کی چمک بس اور اک پل ہے ابھی

शायर: Iftikhar Naseem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरी आँखों की चमक बस और इक पल है अभी
देख ले इस चाँद को कुछ दूर बादल है अभी

आँख तो ख़ुद को नए चेहरों में खो कर रह गई
दिल मगर उस शख़्स के जाने से बोझल है अभी

अब तलक चेहरे पे हैं तूफ़ाँ गुज़रने के निशाँ
तह में पत्थर जा चुका पानी पे हलचल है अभी

तू तो उन का भी गिला करता है जो तेरे न थे
तू ने देखा ही नहीं कुछ भी तू पागल है अभी

कर गया सूरज मुझे तन्हा कहाँ ला कर 'नसीम'
क्या करूँ मैं रास्ते में शब का जंगल है अभी