उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere paikar si koi murat bana li jaegi

तेरे पैकर सी कोई मूरत बना ली जाएगी

تیرے پیکر سی کوئی مورت بنا لی جائے گی

शायर: Raees Warsi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरे पैकर सी कोई मूरत बना ली जाएगी
दिल के बहलाने की ये सूरत निकाली जाएगी

कौन कह सकता था ये क़ौस-ए-क़ुज़ह को देख कर
एक ही आँचल में ये रंगत समा ली जाएगी

काग़ज़ी फूलों से जब मानूस होंगी तितलियाँ
आशिक़ी की रस्म दुनिया से उठा ली जाएगी

आइने में बाल पड़ जाए तो जा सकता नहीं
रेत की दीवार तो फिर से बना ली जाएगी

हम जो कार-ए-आज़री में बे-हुनर ठहरे तो क्या
उन की सूरत शे'र के क़ालिब में ढाली जाएगी

ख़ुद-परस्ती के नशे में जिन को है ज़ो'म-ए-जमाल
आइना देखें तो उन की ख़ुश-ख़याली जाएगी

इश्क़ की फ़ितरत में है परवान ही चढ़ना 'रईस'
हुस्न वो दौलत नहीं जो फिर कमा ली जाएगी