उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere lutf-o-karam se jo daman mein mere aaya hai

तेरे लुत्फ़-ओ-करम से जो दामन में मेरे आया है

تیرے لطف و کرم سے جو دامن میں میرے آیا ہے

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरे लुत्फ़-ओ-करम से जो दामन में मेरे आया है
सीने से वो फूल लगाया ख़ार वो मैं ने चूमा है

पाँव की ज़ंजीर सही तेरी नज़रों में रस्म-ए-वफ़ा
मेरे दिल से पूछो तो ये मेरे दिल का गहना है

अपने ग़मगीं दिल को हम ने बहलाया गो जतनों से
लेकिन मचल गया ये जब भी नाम तुम्हारा आया है

मेरे टूटे दिल में गूँजी आह किसी दुखियारे की
अब मैं समझा गहरा कितना दुख से दुख का नाता है

राख में बरसों से है छुपी इक तेरे प्यार की चिंगारी
याद का झोंका जब भी आया शो'ला सा इक लपका है

नाम है तेरा प्यारा कितना याद है कितनी मीठी सी
उम्र है उन को ना-काफ़ी इक उम्र का अर्सा थोड़ा है

सूरत भोली-भाली है और दिल भी कसक से ख़ाली है
प्यार में उस को क्या उलझाए आठ पहर का रोना है

किस की नज़र में मस्ती है ये किस के तबस्सुम का जादू
छलके सागर बहके रिंद और मय-ख़ाना भी झूमा है

तन्हाई की रातों में भी दिल तो कभी तन्हा न रहा
याद किसी की आती है और दर्द का पहरा रहता है

भूल ही जाएँ अच्छा है और चोटें दिल पर खाई थीं
दिल तो लेकिन फिर से पुराने ज़ख़्म कुरेदा करता है

बीते दिनों के सायों से कुछ चेहरे उभरे प्यारे से
याद से जिस के अब भी 'हबीब' इस दिल का गुलशन महका है