उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere KHat ka jawab likkha hai

तेरे ख़त का जवाब लिक्खा है

تیرے خط کا جواب لکھا ہے

शायर: Ejaz Ansari7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरे ख़त का जवाब लिक्खा है
बे-अदब को जनाब लिक्खा है

मेरे मौला तिरे ख़ज़ाने में
कुछ तो अपना हिसाब लिक्खा है

बे-अमल हो गया हूँ मैं शायद
अब मुसलसल 'अज़ाब लिक्खा है

इक समुंदर के सर्द सीने पर
मौज ने इज़्तिराब लिक्खा है

ली है दुनिया से दुश्मनी हम ने
आप को लाजवाब लिक्खा है

ज़िंदगी दी हिसाब से उस ने
और ग़म बे-हिसाब लिक्खा है

नींद रूठी है इस लिए 'ए'जाज़'
ख़्वाब को हम ने ख़्वाब लिक्खा है