उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere jalwon ne kaisi shart rakh di

तेरे जल्वों ने कैसी शर्त रख दी

تیرے جلووں نے کیسی شرط رکھ دی

शायर: Deepak Jain Deep5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरे जल्वों ने कैसी शर्त रख दी
की ख़ुश्बू देखने की शर्त रख दी

परिंदों का बसेरा और छतों पर
तो क्या पेड़ों ने कोई शर्त रख दी

मिरे मालिक ने आँखें तो अता कीं
मगर इन में नमी की शर्त रख दी

परिंदों की उड़ानें छीन लीं और
हदों को नापने की शर्त रख दी

सभी थे एकता के हक़ में लेकिन
सभी ने अपनी अपनी शर्त रख दी