उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aise darkinar ho gae

ऐसे दरकिनार हो गए

ایسے درکنار ہو گئے

शायर: Deepak Jain Deep5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐसे दरकिनार हो गए
हाशिए के पार हो गए

क्या थी वो जुदाई की ख़बर
लफ़्ज़ तार तार हो गए

बरसों बा'द ये पता चला
हम कहीं शिकार हो गए

तेरे बा'द क्या बताएँ हम
कैसे बे-हिसार हो गए

इक तिरी सदा ने क्या छुआ
दर्द बे-क़तार हो गए