उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apne aapko yun samjhate rahte hain

अपने आप को यूँ समझाते रहते हैं

اپنے آپ کو یوں سمجھاتے رہتے ہیں

शायर: Deepak Jain Deep4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपने आप को यूँ समझाते रहते हैं
उम्मीदों के पर सहलाते रहते है

अपने घर में घर जैसी इक बात तो है
दुख-सुख दोनो आते जाते रहते हैं

तस्वीरों का शौक़ कहाँ तक ले आया
परछाईं पे अक्स बनाते रहते हैं

अपना ज़ब्त ना टूटे इस के ख़ातिर हम
दीवारों को दर्द सुनाते रहते हैं