उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sham se zid par aDe hain

शाम से ज़िद पर अड़े हैं

شام سے ضد پر اڑے ہیں

शायर: Deepak Jain Deep5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शाम से ज़िद पर अड़े हैं
ख़्वाब पलकों पर खड़े हैं

ये शिकन-आलूद बिस्तर
नींद के टुकड़े पड़े हैं

रात की काली रिदा में
क़ीमती मोती जड़े हैं

रात भर पागल हवा से
घर के दरवाज़े लड़े हैं

हो सके तो सर झुका ले
वक़्त के तेवर कड़े हैं