उर्दू शायरी · ग़ज़ल

adhura hi rahe har rasta to

अधूरा ही रहे हर रास्ता तो

ادھورا ہی رہے ہر راستہ تو

शायर: Deepak Jain Deep5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अधूरा ही रहे हर रास्ता तो
ना पहुँचे मंज़िलों तक सिलसिला तो

जिसे चाहें वही खो जाए हम से
हमारे साथ फिर ऐसा हुआ तो

जहाँ आवारगी बिखरी पड़ी हो
मैं उस रस्ते से मंज़िल पा गया तो

तुझे पाने में ख़ुद को भूल बैठा
तुझे पा कर भी मैं तन्हा रहा तो

यक़ीं कर के तिरे पीछे चले हैं
नज़र आए ना फिर भी रास्ता तो