उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere dar tak aaun main

तेरे दर तक आऊँ मैं

تیرے در تک آؤں میں

शायर: Deepak Jain Deep5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरे दर तक आऊँ मैं
आईना हो जाऊँ मैं

मंज़िल अपनी ढूँडे वो
और रस्ता हो जाऊँ मैं

उस का कोई ज़िक्र ना हो
और रुस्वा हो जाऊँ मैं

सब के दा'वे वाजिब हैं
किस के हिस्से आऊँ मैं

तन्हाई को साथ लिए
भीड़ नहीं हो जाऊँ मैं