उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tera ho kar jo chal raha hoga

तेरा हो कर जो चल रहा होगा

تیرا ہو کر جو چل رہا ہوگا

शायर: Naeem Akhtar Khadimi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरा हो कर जो चल रहा होगा
कितना ख़ुद को बदल रहा होगा

शाम से मोम की है क़ुर्बत में
अब तो पत्थर पिघल रहा होगा

मैं भी ये सोच कर चला घर से
वो भी घर से निकल रहा होगा

उस के ख़्वाबों से मैं निकल आया
अब वो आँखों को मल रहा होगा

मेरे तलवों में ये जलन कैसी
कोई सहरा में चल रहा होगा

आइना बे-सबब नहीं हैराँ
कोई चेहरा बदल रहा होगा

उस के हल्क़े से मैं निकल आया
अब वो हाथों को मल रहा होगा