उर्दू शायरी · ग़ज़ल

taswir-e-bagh-o-manzar-e-dariya ulaT gaya

तस्वीर-ए-बाग़-ओ-मंज़र-ए-दरिया उलट गया

تصویر باغ و منظر دریا الٹ گیا

शायर: Zafar Iqbal6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तस्वीर-ए-बाग़-ओ-मंज़र-ए-दरिया उलट गया
बैठे-बिठाए ताक़-ए-तमाशा उलट गया

हम भी गए थे गर्मी-ए-बाज़ार देखने
वो भीड़ थी कि चौक में ताँगा उलट गया

कैसा हमें सताए रखा चशमकों के साथ
की हम ने छेड़-छाड़ तो कैसा उलट गया

जैसे गए थे मौत की महफ़िल से लौट आए
हाथों में आ के ज़ह्र का प्याला उलट गया

जिन्नात वो उठे हैं कि रू-ए-ज़मीन पर
इंसाँ के इक़्तिदार का तख़्ता उलट गया

नक़्क़ाद-ए-कोहना पर असर-ए-शे’र-ए-नौ है ये
पढ़ कर ग़ज़ल ग़रीब का भेजा उलट गया