उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tasawwur se kisi ke maine ki hai guftugu barson

तसव्वुर से किसी के मैं ने की है गुफ़्तुगू बरसों

تصور سے کسی کے میں نے کی ہے گفتگو برسوں

शायर: Haidar Ali Aatish5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तसव्वुर से किसी के मैं ने की है गुफ़्तुगू बरसों
रही है एक तस्वीर-ए-ख़याली रू-ब-रू बरसों

हुआ मेहमान आ कर रात भर वो शम्अ'-रू बरसों
रहा रौशन मिरे घर का चराग़-ए-आरज़ू बरसों

बराबर जान के रक्खा है उस को मरते मरते तक
हमारी क़ब्र पर रोया करेगी आरज़ू बरसों

चमन में जा के भूले से मैं ख़स्ता-दिल कराहा था
किया की गुल से बुलबुल शिकवा-ए-दर्द-ए-गुलू बरसों

अगर मैं ख़ाक भी हूँगा तो 'आतिश' गर्द-बाद-आसा
रखेगी मुझ को सर-गश्ता किसी की जुस्तुजू बरसों