उर्दू शायरी · ग़ज़ल

taras aaya nahin jis ko kabhi bhi haal par mere

तरस आया नहीं जिस को कभी भी हाल पर मेरे

ترس آیا نہیں جس کو کبھی بھی حال پر میرے

शायर: Yashvardhan Mishra4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तरस आया नहीं जिस को कभी भी हाल पर मेरे
वो अपने आप कैसे आ गया फिर जाल पर मेरे

चमक देखो मिरे चेहरे पे ऐसे ही नहीं आई
तुम्हारी याद मारे है तमाचा गाल पर मेरे

तुम्हारे बा'द भी ख़ाली रखी है ये जगह मैं ने
नहीं बैठा कभी कोई भी दिल के ताल पर मेरे

लिखा है उस ने मेरा नाम 'यश्वर्धन' मोहब्बत से
हिना का रंग अब तुम देखना रूमाल पर मेरे