उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh na kuchh aaya to hoga uske ji mein

कुछ न कुछ आया तो होगा उस के जी में

کچھ نہ کچھ آیا تو ہوگا اس کے جی میں

शायर: Yashvardhan Mishra8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ न कुछ आया तो होगा उस के जी में
फिर छुपाया होगा मुझ को डायरी में

डर बहुत लगता था पहले मौत से पर
अब मज़ा आता है मुझ को ख़ुद-कुशी में

बाम पर मैं बैठ कर ये सोचता हूँ
शब नहाई होगी उस की रौशनी में

बात सारी चाँद से करता हूँ उस की
होश रहता ही नहीं बादा-कशी में

मुझ को अब तन्हाई खलती जा रही है
हो रहा है ये तिरी मौजूदगी में

हो गया पागल तिरी ख़ातिर वो लड़का
कुछ कमी रक्खी नहीं दीवानगी में

देख कर तुम को मिरी हालत वही है
चीज़ देखे जैसे बच्चा मुफ़लिसी में

अब नहीं है प्यार तुम से जान मेरी
कह रहा हूँ बात ये नाराज़गी में