उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nikal paDa hun main bekar rah-e-ulfat mein

निकल पड़ा हूँ मैं बेकार राह-ए-उल्फ़त में

نکل پڑا ہوں میں بے کار راہ الفت میں

शायर: Yashvardhan Mishra6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

निकल पड़ा हूँ मैं बेकार राह-ए-उल्फ़त में
मुझे पुकारते हैं ख़ार राह-ए-उल्फ़त में

वो लूट ही तो रहा है हमें मोहब्बत से
कोई नहीं है वफ़ादार राह-ए-उल्फ़त में

जहान-भर को फ़क़त जिस्म से मोहब्बत है
सभी यहाँ हैं गुनहगार राह-ए-उल्फ़त में

कभी किया ही नहीं प्यार मैं ने फिर कैसे
करूँ क़ुबूल अभी हार राह-ए-उल्फ़त में

कभी कभी मिरी आँखों में प्यार आता है
मैं इस क़दर हूँ अदाकार राह-ए-उल्फ़त में

मिरा सुकून मिरा चैन तब से खोया है
हुआ हूँ जब से गिरफ़्तार राह-ए-उल्फ़त में