उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tanqid karo KHub magar dekhte rahna

तन्क़ीद करो ख़ूब मगर देखते रहना

تنقید کرو خوب مگر دیکھتے رہنا

शायर: Saabir Usmani7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तन्क़ीद करो ख़ूब मगर देखते रहना
बे-कार न जाएगा हुनर देखते रहना

हम बीच समुंदर से गुहर ले के हैं आए
तुम बैठ के साहिल पे लहर देखते रहना

आई न कभी लौट के फिर फ़स्ल-ए-बहाराँ
बे-सूद गया मेरा डगर देखते रहना

तुम शोर मचाओ कि जला दो ये बदन भी
होगा न कभी उन पे असर देखते रहना

जिस सम्त चला नूर उसी सम्त अंधेरा
ता-हश्र रहेगा ये सफ़र देखते रहना

नफ़रत के अँधेरों को मोहब्बत ने हराया
अख़बार में आएगी ख़बर देखते रहना

'साबिर' को भला कौन यहाँ जान रहा है
जो है वो न आएगा नज़र देखते रहना