उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum charaghon ko hawaon se Daraata kya hai

हम चराग़ों को हवाओं से डराता क्या है

ہم چراغوں کو ہواؤں سے ڈراتا کیا ہے

शायर: Saabir Usmani6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम चराग़ों को हवाओं से डराता क्या है
जब कि जीवन में सियह शब से ज़ियादा क्या है

ज़िंदा रहने के लिए पूछ असासा क्या है
इक उदासी के सिवा दौलत-ए-उज़मा क्या है

जिन को जीने की तमन्ना है न ख़्वाहिश कोई
उन को ऐ ज़ीस्त बता तेरा तक़ाज़ा क्या है

दश्त-ए-इंसान में लोगों को है बस अपनी पड़ी
कौन सुनता है यहाँ शोर मचाता क्या है

तय है बाज़ार-ए-मोहब्बत में ख़सारा होना
यूँ तो है जिंस मगर मोल वफ़ा का क्या है

ये शब-ओ-रोज़ जहाँ ग़म भी ख़ुशी भी मेरी
इन में वा'इज़ ये बता दे कि ख़ुदा का क्या है