उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi ki chah mein had se guzar gae hote

किसी की चाह में हद से गुज़र गए होते

کسی کی چاہ میں حد سے گزر گئے ہوتے

शायर: Saabir Usmani6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी की चाह में हद से गुज़र गए होते
तो नाम सारे ज़माने में कर गए होते

हमारी प्यास की रख ली है लाज सहरा ने
समुंदरों के सहारे तो मर गए होते

जो मेरे सीना पे हँस के वो हाथ रख देते
तो ज़ख़्म दिल के सभी मेरे भर गए होते

किसी की याद ने हम को सँभाल रखा है
वगर्ना हिज्र में कब के ही मर गए होते

तुम्हारी यादों के सारे ही रंग पक्के हैं
जो होते कच्चे तो कब के उतर गए होते

हमें तो माँ की दु'आओं का ही सहारा है
नहीं तो सहरा में 'साबिर' बिखर गए होते