उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tanhai jahan zikr-e-ruKH-e-yar kare hai

तन्हाई जहाँ ज़िक्र-ए-रुख़-ए-यार करे है

تنہائی جہاں ذکر رخ یار کرے ہے

शायर: Kailash Mahir5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तन्हाई जहाँ ज़िक्र-ए-रुख़-ए-यार करे है
हर ग़म को चराग़-ए-सर-ए-दीवार करे है

वो पुर्सिश-ए-ग़म हो कि तिरा लुत्फ़-ओ-करम हो
दीवाना तो हर बात से इंकार करे है

मुद्दत हुई हम शहर-ए-तमन्ना से चले आए
क्यों हम से सबा ज़िक्र-ए-रुख़-ए-यार करे है

बे-रब्त सी नज़रों में वो अंदाज़-ए-त'अल्लुक़
हर मरहला-ए-ज़ीस्त को दुश्वार करे है

ज़ंजीर न पहनी कि गरेबाँ न किया चाक
यूँ भी कोई रुस्वा सर-ए-बाज़ार करे है