उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tamam umr safar ka samar milega mujhe

तमाम उम्र सफ़र का समर मिलेगा मुझे

تمام عمر سفر کا ثمر ملے گا مجھے

शायर: Iftikhar Naseem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तमाम उम्र सफ़र का समर मिलेगा मुझे
पस-ए-उफ़ुक़ ही कहीं अब तो घर मिलेगा मुझे

ये किस लिए मैं ख़ला-दर-ख़ला भटकता हूँ
वो कौन है जो मिरा चाँद पर मिलेगा मुझे

मिला न जिस के लिए घर का नर्म गर्म सुकून
यहीं कहीं वो सर-ए-रहगुज़र मिलेगा मुझे

अज़ाब ये है कि तन्हा कटेगी उम्र तमाम
सफ़र के बाद कोई हम-सफ़र मिलेगा मुझे

कहीं दिखाई न दे काश छोड़ने वाला
कहूँगा क्या मैं उसे अब अगर मिलेगा मुझे