उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tamam nekiyan dariya mein Dalne ke liye

तमाम नेकियाँ दरिया में डालने के लिए

تمام نیکیاں دریا میں ڈالنے کے لیے

शायर: Aadarsh Dubey6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तमाम नेकियाँ दरिया में डालने के लिए
निकल पड़े हैं समुंदर खंगालने के लिए

सितम तो ये है के तेशा नहीं मिला हम को
पहाड़ काट के रस्ता निकालने के लिए

न जाने कितनों की क़ीमत गिराई जाती है
अमीर-ए-शहर की क़ीमत उछालने के लिए

हम ऐसे लोगों को लाया गया है दुनिया में
कुएँ में कूद के सिक्का निकालने के लिए

किसी के हिज्र की हम आग पीते रहते हैं
सुलगते लफ़्ज़ों को ग़ज़लों में ढालने के लिए

ज़रा सँभालना आ जाए आदमी को अगर
तो एक ग़म ही बहुत है सँभालने के लिए