उर्दू शायरी · ग़ज़ल

talKH-sazi ne hamein gham ke siwa kuchh na diya

तल्ख़-साज़ी ने हमें ग़म के सिवा कुछ न दिया

تلخ سازی نے ہمیں غم کے سوا کچھ نہ دیا

शायर: Lucky farooqi Hasrat8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तल्ख़-साज़ी ने हमें ग़म के सिवा कुछ न दिया
बे-नियाज़ी ने हमें ग़म के सिवा कुछ न दिया

हम कोई कृष्न नहीं थे की थिरकती राधा
नय-नवाज़ी ने हमें ग़म के सिवा कुछ न दिया

ये कटे हाथ ये नासूर-ए-बदन शाहिद हैं
तेग़-बाज़ी ने हमें ग़म के सिवा कुछ न दिया

उस के होंटों में कई रंग थे रुस्वाई के
बोसा-बाज़ी ने हमें ग़म के सिवा कुछ न दिया

हर तबस्सुम के तआ'क़ुब में कई आँसू हैं
दिल-नवाज़ी ने हमें ग़म के सिवा कुछ न दिया

जिस्म परहेज़ की तश्हीर बना बैठा है
चारासाज़ी ने हमें ग़म के सिवा कुछ न दिया

कोई मोहरा न ज़फ़र-याब हुआ चाहत का
दिल की बाज़ी ने हमें ग़म के सिवा कुछ न दिया

दिल की मस्जिद में तिरी याद है पाबंद-ए-सलात
इस नमाज़ी ने हमें ग़म के सिवा कुछ न दिया