उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tabiat koi din mein bhar jaegi

तबीअ'त कोई दिन में भर जाएगी

طبیعت کوئی دن میں بھر جائے گی

शायर: Dagh Dehlvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तबीअ'त कोई दिन में भर जाएगी
चढ़ी है ये आँधी उतर जाएगी

रहेंगी दम-ए-मर्ग तक ख़्वाहिशें
ये निय्यत कोई आज भर जाएगी

रहे पैरवी हिज्र हो या विसाल
कि इक बात आख़िर ठहर जाएगी

मोहब्बत में ऐ दिल न डर सर पे खेल
वो बाज़ी नहीं ये कि हर जाएगी

न गुज़री शब-ए-हिज्र समझे थे हम
तड़पते फड़कते गुज़र जाएगी

दिया दिल तो ऐ 'दाग़' अंदेशा क्या
गुज़रनी जो होगी गुज़र जाएगी