उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tasir-e-muKHtalif ki rawani se jal gae

तासीर-ए-मुख़्तलिफ़ की रवानी से जल गए

تاثیر مختلف کی روانی سے جل گئے

शायर: Lucky farooqi Hasrat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तासीर-ए-मुख़्तलिफ़ की रवानी से जल गए
सूरज के होंठ बर्फ़ के पानी से जल गए

लफ़्ज़ों की सीढ़ियों से उतरते हुए ख़याल
काग़ज़ पे आ के सोज़-ए-मआ'नी से जल गए

अब सुब्ह शाम कीजिए पानी की पट्टियाँ
सहरा हमारी तिश्ना-दहानी से जल गए

उस शे'र के था मिसरा-ए-अव्वल में ज़िक्र-ए-आब
नक़्क़ाद जिस के मिस्रा-ए-सानी से जल गए

कुछ लोग ख़ाक हो गए हिजरत की आग से
कुछ लोग शौक़-ए-नक़्ल-ए-मकानी से जल गए

आवाज़ के दरख़्त का मेआ'र क्या गिरा
होंटों के फूल तल्ख़-बयानी से जल गए