उर्दू शायरी · ग़ज़ल

talluq ke bahaw ka muqaddam istiara kis jagah hai

तअ'ल्लुक़ के बहाव का मुक़द्दम इस्तिआ'रा किस जगह है

تعلق کے بہاؤ کا مقدم استعارہ کس جگہ ہے

शायर: Yasmeen Hameed6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तअ'ल्लुक़ के बहाव का मुक़द्दम इस्तिआ'रा किस जगह है
मिरे गहरे समुंदर तेरी वहशत का किनारा किस जगह है

बता ऐ रोज़-ओ-शब की बे-सबाती में तवाज़ुन रखने वाले
जिसे कल टूटना है आज वो रौशन सितारा किस जगह है

बता सरसब्ज़ खेतों से गुज़रने वाले बे-आवाज़ दरिया
अचानक पेच खा कर रुख़ बदलने का इशारा किस जगह है

बशारत जिस के होने की मुझे पहले क़दम पर दी गई थी
वो गहरे अब्र का साया मसाफ़त का सहारा किस जगह है

सफ़र करना है और अंधा मुसाफ़िर सोचता है किस से पूछे
सर-ए-हस्ती अंधेरे रास्तों का गोश्वारा किस जगह है

न सत्ह-ए-आब पर है और न तह में इस के हैं आसार कोई
बता ऐ बहर-ए-ग़म काग़ज़ की कश्ती को उतारा किस जगह है