उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek ek harf sameTo mujhe tahrir karo

एक इक हर्फ़ समेटो मुझे तहरीर करो

ایک اک حرف سمیٹو مجھے تحریر کرو

शायर: Yasmeen Hameed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक इक हर्फ़ समेटो मुझे तहरीर करो
मेरी यकसूई को आमदा-ए-ज़ंजीर करो

सब ख़द-ओ-ख़ाल मिरे धुँद हुए जाते हैं
सुब्ह के रंग से आओ मुझे तस्वीर करो

जीतना मेरे लिए कर्ब हुआ जाता है
मेरे पिंदार को तोड़ो मुझे तस्ख़ीर करो

उस 'इमारत को गिरा दो जो नज़र आती है
मिरे अंदर जो खंडर है उसे ता'मीर करो

अब मेरी आँख से ले लो ख़लिश-ए-बीनाई
या मिरे ख़्वाब को शर्मिंदा-ए-ताबीर करो