उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hamein KHabar thi bachane ka us mein yara nahin

हमें ख़बर थी बचाने का उस में यारा नहीं

ہمیں خبر تھی بچانے کا اس میں یارا نہیں

शायर: Yasmeen Hameed6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हमें ख़बर थी बचाने का उस में यारा नहीं
सो हम भी डूब गए और उसे पुकारा नहीं

ख़ुद आफ़्ताब मिरी राह का चराग़ बने
मगर ये बात मिरे चाँद को गवारा नहीं

जो उस में उतरी तो तूफ़ान ही मिलेंगे मुझे
मैं जानती हूँ कि वो मौज है किनारा नहीं

अजब फ़ज़ा है कि रंग-ए-नुमूद-ए-सुब्ह भी है
सियाह रात ने भी पैरहन उतारा नहीं

वजूद जिस को किसी मो'तबर शजर ने दिया
हवा की ज़द में भी तिनका वो बे-सहारा नहीं

जलेगा ख़ुद भी सहर तक मुझे भी लौ देगा
चराग़-ए-शाम कोई बख़्त का सितारा नहीं