उर्दू शायरी · ग़ज़ल

taib nahin hun be-KHud-o-sarshaar bhi nahin

ताइब नहीं हूँ बे-ख़ुद-ओ-सरशार भी नहीं

تائب نہیں ہوں بے خود و سرشار بھی نہیں

शायर: Jagdish Sahay Saxena7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ताइब नहीं हूँ बे-ख़ुद-ओ-सरशार भी नहीं
जो इस तरह पिए वो गुनहगार भी नहीं

ज़िंदान-ए-रंग-ओ-बू में गुज़ारी है उम्र यूँ
आज़ाद भी नहीं हूँ गिरफ़्तार भी नहीं

इतनी सी बात है वो तग़ाफ़ुल-शिआ'र है
गर मेहरबाँ नहीं तो सितमगार भी नहीं

क्या पूछते हो आशिक़-ए-बे-दिल की आरज़ू
जब दिल नहीं तो हसरत-ए-दीदार भी नहीं

बोले कि तुम को क़त्ल किया मैं ने किस तरह
देखो ज़रा कि हाथ में तलवार भी नहीं

वीराँ किया है यास ने यूँ बाग़-ए-आरज़ू
फूलों का ज़िक्र क्या है वहाँ ख़ार भी नहीं

गर दोस्तों के लुत्फ़ का क़ाइल नहीं हूँ मैं
लब पर मिरे शिकायत-ए-अग़्यार भी नहीं