उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ahl-e-duniya ne sikhaya mujhe hairan hona

अह्ल-ए-दुनिया ने सिखाया मुझे हैराँ होना

اہل دنیا نے سکھایا مجھے حیراں ہونا

शायर: Jagdish Sahay Saxena7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अह्ल-ए-दुनिया ने सिखाया मुझे हैराँ होना
कैसे इंसाँ हैं कि आता नहीं इंसाँ होना

क्या तिरी ज़ुल्फ़-ए-सियह-ताब को ऐ माया-नाज़
ग़म-ए-उल्फ़त से भी आता है परेशाँ होना

ग़ैरत-ए-मेहर कहा उन को तो हँस कर बोले
कैसे मंज़ूर हो अब शम-ए-शबिस्ताँ होना

और हुस्न-ए-ग़म-ए-हस्ती को बढ़ा देता है
शौक़-ए-गेसू में तिरे दिल का परेशाँ होना

न बहारों से ग़रज़ है न ख़िज़ाँ से मतलब
सीख ले मुझ से कोई ख़ार-बदामाँ होना

मेरी दानिस्त में तौहीन-ए-गुनहगारी है
ऐ गुनहगार गुनाहों पे पशेमाँ होना

कअ'र-ए-दरिया में भी इक साहिल-ए-राहत है निहाँ
भूल है मौजा-ए-तूफ़ाँ से हिरासाँ होना