उर्दू शायरी · ग़ज़ल

fart-e-alam se aah kiye ja raha hun main

फ़र्त-ए-अलम से आह किए जा रहा हूँ मैं

فرط الم سے آہ کئے جا رہا ہوں میں

शायर: Jagdish Sahay Saxena6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़र्त-ए-अलम से आह किए जा रहा हूँ मैं
ऐ 'इश्क़ क्या गुनाह किए जा रहा हूँ मैं

मक़्बूल होंगे दहर में दाग़-ए-जिगर मिरे
उन को चराग़-ए-राह किए जा रहा हूँ मैं

रंज-ओ-अलम का लुत्फ़ उठाने के वास्ते
राहत से भी निबाह किए जा रहा हूँ मैं

गुलज़ार-ए-काम-रानी ओ दुनिया-ए-आरज़ू
आ'माल से तबाह किए जा रहा हूँ मैं

मुझ को 'अता हुआ था दिल-ए-आइना-जमाल
सद हैफ़ उसे सियाह किए जा रहा हूँ मैं

ग़म कह रहा है कौन है मुझे से सिवा 'अज़ीज़
सब के दिलों में राह किए जा रहा हूँ मैं