उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tab zarre hain agar ho to wahi dil ho jae

ताब ज़र्रे हैं अगर हो तो वही दिल हो जाए

تاب ذرے ہیں اگر ہو تو وہی دل ہو جائے

शायर: Ijtiba Rizvi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ताब ज़र्रे हैं अगर हो तो वही दिल हो जाए
आम जल्वा है तिरा जो मुतहम्मिल हो जाए

तेरा हर शो'बदा ऐ हुस्न हक़ीक़त ठहरे
हम कोई नक़्श बना लें तो वो बातिल हो जाए

लाख बे-बाक निगाहों से निगाहें लड़ जाएँ
एक सहमी सी नज़र हो तो वो क़ातिल हो जाए

डूबना शर्त-ए-सफ़र है मुझे ऐ शोरिश-ए-बहर
वर्ना गिर्दाब को दूँ हुक्म तो साहिल हो जाए

तुझ को क़ुदरत है कि हर ज़र्रे को इक दिल कर दे
मुझ को हसरत है कि जो दिल है मिरा दिल हो जाए

अपनी तस्वीर-ए-मजाज़ी कोई रख दो कि कहीं
कारवान-ए-निगह-ए-शौक़ को मंज़िल हो जाए

हिम्मत-ए-इश्क़ कि है हुस्न की फ़ितरत का ये राज़
सौ को बिस्मिल करे और एक का बिस्मिल हो जाए

आज तक तक न सके दिल कोई अपने क़ाबिल
तुम कि पत्थर को जो ताको तो वही दिल हो जाए

हैफ़ अपने सफ़र-ए-शौक़ की क़िस्मत 'रिज़वी'
पाँव थक जाएँ जहाँ बस वहीं मंज़िल हो जाए