उर्दू शायरी · ग़ज़ल

surat se jo dikhai diye the gharib se

सूरत से जो दिखाई दिए थे ग़रीब से

صورت سے جو دکھائی دئیے تھے غریب سے

शायर: Daood Kaashmiri4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सूरत से जो दिखाई दिए थे ग़रीब से
अब रश्क हर किसी को है उन के नसीब से

फिर उस के बा'द हम भी जलें तूर की तरह
बस एक बार देख लें उन को क़रीब से

जब संग-रेज़ा हमदम-ए-देरीना हो गए
तो तिश्नगी बुझा गए जो थे रक़ीब से

बे-फ़िक्र बे-ख़बर चला जाता था इक हुजूम
थम जाओ इक सदा थी वो किस की सलीब से