उर्दू शायरी · ग़ज़ल

log gham se Darte hain main KHushi se Darta hun

लोग ग़म से डरते हैं मैं ख़ुशी से डरता हूँ

لوگ غم سے ڈرتے ہیں میں خوشی سے ڈرتا ہوں

शायर: Daood Kaashmiri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लोग ग़म से डरते हैं मैं ख़ुशी से डरता हूँ
तीरगी से क्या डरना रौशनी से डरता हूँ

मैं निकल पड़ा घर से अब सफ़र में जो बीते
आगे चलते रहना है वापसी से डरता हूँ

ये भी जानवर सारे वो भी जानवर सारे
जाने कैसी बस्ती है आदमी से डरता हूँ

रहज़न-ए-ख़ुलूस-ए-जाँ रहज़न-ए-मसर्रत है
रहनुमाई-ए-इल्म-ओ-आगही से डरता हूँ

सर उठा के जीने की लज़्ज़तों से वाक़िफ़ हूँ
सर उठा के जीने की बे-हिसी से डरता हूँ