उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mai-KHane ki raunaq hai juda shan-e-haram aur

मय-ख़ाने की रौनक़ है जुदा शान-ए-हरम और

مے خانہ کی رونق ہے جدا شان حرم اور

शायर: Daood Kaashmiri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मय-ख़ाने की रौनक़ है जुदा शान-ए-हरम और
मय-कश का मिज़ाज और है ज़ाहिद का भरम और

नाकामी-ए-तकमील-ए-तमन्ना है इक आग़ाज़
अस्बाब-ए-ग़म-ए-जाँ तो अभी होंगे बहम और

कुछ दश्त-नवर्दी के तो कुछ कोह-कनी के
अफ़्साना-ए-तश्हीर-ए-वफ़ा होंगे रक़म और

पस्पाई पे आमादा जो सरदारोँ को देखा
हम ले के बढ़े ख़ून-ए-तमन्ना का अलम और

इक लफ़्ज़ की तफ़्सीर बना ख़ून जिगर का
है ज़ीस्त का मफ़्हूम कि मौला का करम और