उर्दू शायरी · ग़ज़ल

suna paDa hai dil ka makan aap ke bina

सूना पड़ा है दिल का मकाँ आप के बिना

سونا پڑا ہے دل کا مکاں آپ کے بنا

शायर: Aadarsh Dubey5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सूना पड़ा है दिल का मकाँ आप के बिना
रह रह के उठ रहा है धुआँ आप के बिना

यूँ तो खिले हैं फूल कई रंग के मगर
फीके पड़े हैं दोनों जहाँ आप के बिना

ये सोच के मैं घूम रहा हूँ यहाँ वहाँ
राहत मिलेगी दिल को कहाँ आप के बिना

बस इस लिए ही गाँव से मैं शहर आ बसा
मैं क्या करूँगा रह के वहाँ आप के बिना

'आदर्श' कह रहा है कि मत आओ मेरे पास
बर्बाद हो गया हूँ यहाँ आप के बिना