उर्दू शायरी · ग़ज़ल

soz-o-gudaz-e-ishq ka lazzat-chashida hun

सोज़-ओ-गुदाज़-ए-इश्क़ का लज़्ज़त-चशीदा हूँ

سوز و گداز عشق کا لذت چشیدہ ہوں

शायर: Dagh Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सोज़-ओ-गुदाज़-ए-इश्क़ का लज़्ज़त-चशीदा हूँ
मानिंद-ए-आबला हमा-तन आबदीदा हूँ

गर तू न हो तो फिर किसी काफ़िर का दिल लगे
दोज़ख़ में आरमीदा इरम से रमीदा हूँ

अल्लाह रे कशाकश-ए-दैर-ओ-हरम कि मैं
ज़ालिम हज़ार हाथ से दामन-दरीदा हूँ

परवाना पास शम्अ' के बुलबुल है गुल के पास
इक मैं कि तेरी बज़्म में ख़ल्वत-गज़ीदा हूँ

उफ़्तादगी पे भी न गई उस की जुस्तुजू
गोया ज़मीं पे साया-ए-मुर्ग़-ए-परीदा हूँ

ऐ आरज़ू-ए-ताज़ा न कर मुझ से छेड़-छाड़
मैं पा-ए-शौक़-ओ-दस्त-ए-तमन्ना-बुरीदा हूँ

ऐ 'दाग़' जिस के वास्ते रोज़-ए-जज़ा बना
वो कौन है वो मैं ही तो आफ़त-रसीदा हूँ